अध्याय 4

वह ब्रायन के दुबले-पतले, हड्डियों जैसे शरीर के सामने भी खुद को रोक नहीं पाई थी—सेथ के सामने तो सवाल ही नहीं उठता।

और अगर वह अपनी रक्षा के लिए ब्रायन पर कुछ फेंक भी सकती थी, तो सेथ को ज़रा-सा भी नुकसान पहुँचाना उसके बस की बात नहीं थी।

सेथ ने लैला की घबराहट और छटपटाहट को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया। बिना किसी मेहनत के उसने उसकी पैंटी फाड़ डाली। उसके हाथ उसकी कमर को ऐसे जकड़े थे जैसे उसे अपने शरीर से चिपकाकर कुचल देना चाहता हो।

“सेथ! आज मेरी पीरियड्स का पहला दिन है! हम नहीं कर सकते!”

पैंटी फाड़ते वक्त सेथ ने उसके सैनिटरी पैड पर खून के हल्के दाग देख लिए थे, मगर उसे परवाह नहीं थी। उसने पीछे से उसकी गर्दन मोड़कर उसके होंठों पर ज़बरदस्ती चुंबन जड़ दिया, और उसके दाँत उसकी जीभ में इतनी तीव्रता से धँस गए मानो वह उसे निगल जाना चाहता हो।

लैला को लगा उसका सिर दबाव से टूट जाएगा। उसके हाथ सोफ़े पर पड़े थ्रो/कंबल को बेतहाशा पकड़ गए; पकड़ की ताकत से उसके नाखून जैसे टूटने को हो आए।

जितने-से पलों में उसे साँस मिलती, वह हाँफते हुए गिड़गिड़ाती, “सेथ, आज नहीं, प्लीज़… सच में नहीं हो सकता… प्लीज़…”

“क्या नहीं हो सकता? यही तो सबसे सही है। अब तो हमें प्रोटेक्शन की ज़रूरत भी नहीं।” यह कहते ही सेथ ने उसे हिंसक ढंग से धकेलकर अपने भीतर ले लिया, और लैला दर्द से चीख उठी। उसने ज़रा भी रहम नहीं किया; हर ज़ोरदार झटके के साथ वह उसके शरीर को तोड़ता चला गया।

लैला के मुँह से टूटी-फूटी चीखें और विनती निकलती रहीं, मगर सेथ ने जैसे कुछ सुना ही नहीं। वह उसी ताक़तवर लय में चलता रहा और उसके बालों को बेरहमी से पकड़कर खींचता रहा।

अनजाने में लैला की नज़र फोन की स्क्रीन पर पड़ी—वहीं उनकी परछाईं में उसकी बेइज़्ज़त हालत साफ दिख रही थी। उसका चेहरा धीरे-धीरे बेरंग पड़ गया, आँखों में आँसू भर आए। उसका आत्मसम्मान एक-एक टुकड़ा करके रौंदा जा रहा था। उसने संघर्ष करना छोड़ दिया—सेथ उसके पराजित शरीर के साथ जो कर रहा था, वह बस सहती रही, जैसे उसकी आत्मा भीतर से खींच ली गई हो।

एक अनंत-सा समय गुजरने के बाद आखिर सेथ उसके ऊपर से हट गया। तब तक वह मरी हुई मछली की तरह पड़ी थी, और फटे हुए कपड़े उसके शरीर पर इधर-उधर बिखरे थे। अगर वे शादीशुदा न होते, तो लैला की हालत देखकर लगता कि उसके साथ ज़बरदस्ती हुई है।

सेथ ने अपने कपड़े ठीक किए और सोफ़े पर पड़ी लैला की ओर देखा। उसे उसकी यह हालत से घिन आ रही थी—किसी को भी लगेगा जैसे वह अभी-अभी किसी लाश के साथ सोकर उठा हो।

“ऐसे पड़े मत रहो। घिन आती है। उठो और जाकर नहा लो। जो कपड़े मैंने फाड़े हैं, उनकी जगह मैं नए खरीद दूँगा।” बोलते-बोलते सेथ ने वह फोन उठाया जो रिकॉर्डिंग कर रहा था, फुटेज को एक नज़र जल्दी से देखकर उसे अपनी जेब में रख लिया।

लैला अपने भारी-भारी शरीर को घसीटते हुए सोफ़े से उठी, कदम लड़खड़ाते थे। देह में मानो बिल्कुल ताक़त नहीं बची थी—मांसपेशियाँ दुख रही थीं, जोड़ अकड़े थे, और साँस लेना तक मुश्किल लग रहा था।

अब उसे इस बात की भी परवाह नहीं थी कि वह आधी नंगी है। वह ज़ॉम्बी की तरह खड़ी हुई और सीढ़ियों की ओर चल पड़ी।

सेथ ने गंभीर चेहरे के साथ लैला की पीठ को जाते देखा, मगर चुप रहा।

बाथरूम पहुँचकर लैला ने दरवाज़ा बंद कर लिया और आईने के सामने खड़ी होकर अपनी बिखरी हुई परछाईं को घूरने लगी।

उसके चेहरे पर आँसू बहने लगे—बाल उलझे थे, शरीर आधा खुला था, गर्दन और बाँहों पर सेथ के निशान थे। वह किसी सदमे में डूबी देह-व्यापार करने वाली औरत जैसी लग रही थी—इतनी वीभत्स कि वह खुद को देख भी नहीं पा रही थी।

उसने बचे-खुचे चिथड़े उतार दिए और शॉवर के नीचे चली गई। पानी उसके शरीर पर गिरता रहा और आँसू उसी धार में मिलते रहे। उसने दोनों हथेलियों से चेहरा ढक लिया और दबे हुए दुःख के साथ फूट-फूटकर रोने लगी।

वह सेथ की मंशा साफ़ समझ गई थी—उसका सोचना था कि इस हरकत से सब कुछ “निपट” जाएगा। उसकी नज़र में वह हमेशा बस एक लाचार-सी लड़की रही थी, जिसकी ज़रूरतें सिर्फ़ सेक्स से पूरी की जा सकती थीं।

करीब दस मिनट बाद जब वह बाथरूम से बाहर निकली, तो सेथ बेडरूम की एक आरामकुर्सी पर बैठा अख़बार पढ़ रहा था। उसने कपड़े बदल लिए थे, और उसके बाल हल्के-से गीले थे—जैसे वह भी नहा चुका हो।

लायला को बाहर आते देख उसके माथे पर नाराज़गी की लकीरें उभर आईं। “शॉवर में इतना वक्त क्यों लगा?”

लायला ने भावहीन आँखों से उसकी ओर देखा और ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठकर मशीन की तरह चेहरे पर मॉइश्चराइज़र लगाने लगी।

आईने में उसने देखा—सेथ उठकर पीछे से उसकी ओर आ रहा है। जैसे ही वह झुककर उसे पीछे से बाँहों में भरने लगा, मर्दाना देह की तीखी-सी गंध में हल्की-सी धुएँ की बू भी मिलकर उसे घेरने लगी।

लायला का शरीर काँप उठा; भीतर से विरोध करने की सहज चाह जगी, लेकिन कुछ ही सेकंड में वह बिलकुल स्थिर हो गई।

लड़ने का मतलब ही क्या था? वह वैसे भी उसे मात नहीं दे सकती थी।

सेथ ने उसके बालों की खुशबू धीरे से साँस में भरी, फिर धीरे-धीरे नीचे सरकते हुए अपनी साँसें उसकी गर्दन के मोड़ में दबा दीं।

लायला के शरीर के बारे में सेथ को मानना पड़ा—उसे उसकी तलब थी; मुलायम, नाज़ुक, और उसकी अपनी प्राकृतिक खुशबू, जो बस छू भर से उसे बेचैन कर देती थी।

“कल अस्पताल जाकर जाँच करा लेना। मेरी जानकारी में पीरियड्स के दौरान कभी-कभार संबंध हानिकारक नहीं होते, और तुमने नहा लिया है, तो इन्फेक्शन का भी खतरा नहीं।”

यह सुनकर लायला के होंठों पर कड़वी-सी मुस्कान झलक गई, और उसकी आँखों में गहरी बेबसी और निराशा उतर आई।

“मुझे मॉर्निंग-आफ्टर पिल दे दीजिए,” उसने धीमे से कहा, उसकी आवाज़ मुश्किल से सुनाई दे रही थी।

“पीरियड्स में उसकी ज़रूरत नहीं होती।”

“एहतियात के लिए।”

सेथ ने त्योरी चढ़ाई, लेकिन लायला ने आईने के पार उसकी नज़र से नज़र मिला ली। “आपने ही तो एक बार कहा था कि मैं आपके बच्चे की माँ बनने लायक नहीं हूँ। तो फिर सावधानी तो रखनी चाहिए।”

यह बात सेथ को चुप करा गई। उसके चेहरे के भाव हल्के-से बदले, फिर भी वह अड़ा रहा, “इस बार नहीं चाहिए।”

लायला ने उसकी बात अनसुनी कर दी। वह सीधे उठकर बेडसाइड टेबल तक गई। झुककर उसने दराज़ खोली और बोतल से एक गोली बिना पानी के ही निगल ली।

उसकी यह हरकत सेथ को खा गई। उसकी भौंहें गहराई से सिकुड़ गईं। “क्या तुम जान-बूझकर मेरी अवज्ञा कर रही हो?”

“नहीं। आपने कहा था सावधानी रखो, और मैं एहतियात करूँ तो आपको गुस्सा आता है? आपको चाहिए क्या?” लायला ने बिना किसी भाव के, हल्का-सा आँखें उठाकर कहा।

उसके गले तक कुछ शब्द आए, मगर अंत में वह चुप ही रह गया।

सेथ ने घड़ी देखी—लगभग नौ बज रहे थे। “मुझे भूख लगी है। जाकर मेरे लिए कुछ खाने को बना दो।”

लायला ने उसकी ओर देखा; उसकी आँखों में बस उजाड़पन था। उसने पूछा, “अब आप वीडियो डिलीट कर देंगे?”

सेथ का चेहरा शांत रहा, मानो उसे कोई फर्क ही न पड़ता हो। “नहीं। अगर तुमने फिर कभी तलाक़ का ज़िक्र किया, तो मैं वीडियो रिलीज़ कर दूँगा।”

एक झटके में लायला की पुतलियाँ सिमट गईं। उसका चेहरा सफ़ेद पड़ गया, और वह उसी जगह जड़ हो गई—जैसे किसी कठपुतली की डोर कट गई हो।

सेथ सच में उसके खिलाफ़ कोई भी घिनौनी चाल चल सकता था।

वह उससे इतना नफ़रत क्यों करता था?

काफी देर बाद लायला ने कड़वाहट से कहा, “अगर आप मुझसे इतनी नफ़रत करते हैं, तो मुझे तलाक़ क्यों नहीं दे देते?”

“मैं वो शब्द फिर कभी नहीं सुनना चाहता। तुम्हें लगता है मैं तुम्हें तलाक़ नहीं देना चाहता? अपने आप को ज़्यादा अहम मत समझो। मैं अपने दादाजी की आख़िरी इच्छा निभा रहा हूँ—मरने से पहले उन्होंने मुझसे वादा लिया था कि मैं तुम्हें कभी तलाक़ नहीं दूँगा। वरना मैं तुम्हें बहुत पहले ही स्टैंटन परिवार से बाहर फेंक चुका होता। तुम्हें मेरे दादाजी का शुक्रगुज़ार होना चाहिए!”

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